संविधान संशोधन 2021,The constitution amendment

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भारत में नवीनतम संविधान संशोधन 2021

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नवीनतम संविधान संशोधन 2021

संविधान अनुच्छेद 368 (1) :-संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्रदान करता है । अनुच्छेद यह कहता है कि इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी संसद अपनी संविधायी शक्ति का प्रयोग करते हुए इस संविधान के किसी उपबन्ध का परिवर्द्धन परिवर्तन या निरसन के रूप में इस अनुच्छेद में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार संशोधन कर सकेगी ।

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अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन, भारतीय संविधान की एक मूल संशोधन प्रक्रिया है।

संविधान में संशोधन निम्न तरीको से
1.साधारण बहुमत,
2.विशेष बहुमत
3.कम से कम आधे राज्यों द्वारा पारित

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नवीनतम संविधान संशोधन 2021

100वा संविधान संशोधन 2015 में
(28 अगस्त 2015)
भारत और बांग्लादेश के बीच हुई भू-भाग सीमा संधि के लिए आपसी सहमति से कुछ भू-भागों का आदान-प्रदान समझौते के तहत

• बांग्लादेश से भारत में शामिल लोगों को भारतीय नागरिकता भी दी गई

• भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1974 का भूमि सीमा समझौता तथा इसके प्रोटोकॉल वर्ष 2011 के अनुपालन में भारत द्वारा कुछ भू-भागों का अधिग्रहण एवं कुछ अन्य भू-भागों को बांग्लादेश को हस्तांतरण किया गया। (भूखंडों का आदान- प्रदान तथा अवैध अधिग्रहण को हस्तांतरित कर)।
• इस उद्देश्य के लिये, संविधान की प्रथम अनुसूची में चार राज्यों के क्षेत्रें (असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय एवं त्रिपुरा) हो संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया गया।

101 वा संविधान संशोधन वस्तु एवं सेवा कर 2016 जीएसटी की व्यवस्था लागू( 122 वा संविधान संशोधन विधेयक) (जीएसटी 1 जुलाई 2017 से लागू)

संविधान में अनुच्छेद 269अ स्थापित किया गया
• इस संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 270 में निर्धारित किया गया कि केंद्र द्वारा संग्रहित जीएसटी को केंद्र व राज्यों में बांटा जाएगा

102 वां संविधान संशोधन 2018
(123वा संविधान संशोधन विधेयक,एनसीबीसी.)

इस संशोधन के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया
अनुच्छेद 338, 338 क व 338ख जोड़े गए

103 वां संविधान संशोधन 2019
(124वा संविधान संशोधन विधेयक)

इस संशोधन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (ईडब्ल्यूएस.) के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था की गई

• अनुच्छेद -15(6),16(6) में संशोधन कर जोड़ा गया

104वां संविधान संशोधन2020
(126वा संविधान संशोधन विधेयक)

संविधान संशोधन के तहत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन किया गया है
• लोकसभा और विधानसभा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की अवधि 10 वर्ष और बढ़ाया गया

• अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति के लिए लोकसभा राज्यसभा विधानसभा में 25 जनवरी 2030 तक सीटों का आरक्षण बढ़ाने का प्रावधान

• वर्तमान में लोक सभा में 84 सीट एससी.हेतु और 47 एस टी. वर्ग के लिए आरक्षित है।

• इस संविधान संशोधन विधेयक द्वारा संसद में एंग्लो इंडियन समुदाय के आरक्षण को समाप्त कर दिया गया

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 97वें संशोधन को सहकारी समितियों से संबंध की हद तक रद्द किया (जुलाई 2021)

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात उच्च न्यायालय के 2013 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसने संविधान (97वां संशोधन) 2011 के प्रावधानों को उस हद तक खारिज कर दिया, जिस हद तक उसने सहकारी समितियों से निपटने के लिए संविधान में भाग IX बी पेश किया था।

जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीआर गवई की 3 जजों की बेंच ने गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ भारत संघ द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। करने के आदेश पर दायर पुनर्विचार याचिका खारिज की जबकि जस्टिस नरीमन और जस्टिस बीआर गवई के बहुमत के फैसले ने सहकारी समितियों से निपटने के लिए संशोधन द्वारा पेश किए गए भाग IX बी को खारिज कर दिया, जस्टिस केएम जोसेफ ने असहमति में पूरे संशोधन को रद्द कर दिया।

जस्टिस नरीमन ने फैसला सुनाते हुए कहा, “जहां तक ​​सहकारी समितियों का संबंध है, मैंने भाग IX बी को रद्द कर दिया है, जस्टिस केएम जोसेफ ने एक असहमतिपूर्ण निर्णय दिया है, जहां पूरे संविधान संशोधन को रद्द कर दिया गया है।”

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127वां संविधान संशोधन विधेयक 2021 संसद में पारित

राज्यसभा में 11 अगस्त 2021 बुधवार को

सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) की पहचान करने और निर्दिष्ट करने के लिए राज्य सरकारों की शक्ति को बहाल करने के लिए 127वां संविधान संशोधन विधेयक 2021 पारित किया।

इस संशोधन को मराठा कोटा मामले में सुप्रीम कोर्ट के 3: 2 के फैसले द्वारा रद्द कर दिया गया था। उक्त मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने 3:2 बहुमत से कहा था कि राज्यों के पास 102वें संविधान संशोधन के बाद SEBC को पहचानने और निर्दिष्ट करने की शक्ति का अभाव है। ऐसी शक्ति भारत के राष्ट्रपति के पास है।

विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट का बहुमत का फैसला केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए रुख के खिलाफ था कि 102 वें संविधान संशोधन ने राज्यों की शक्ति को प्रभावित नहीं किया। 102वें संशोधन को दी गई न्यायिक व्याख्या की समीक्षा की मांग करने वाली केंद्र सरकार द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया गया था।

इसके बाद अब केंद्र ने यह बिल पेश किया है।विधेयक में
अनुच्छेद 342A
में संशोधन करने का प्रस्ताव है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति की शक्ति केंद्र सरकार के उद्देश्यों के लिए केंद्रीय सूची में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को निर्दिष्ट करने की है।

यह मराठा आरक्षण कोटा मामले में भारत के महान्यायवादी द्वारा दिए गए तर्क के अनु सार है कि राष्ट्रपति की शक्ति केवल केंद्रीय सूची के प्रयोजनों के लिए SEBC को निर्दिष्ट करने की है।

संशोधन में अनुच्छेद 342ए में खंड (3) जोड़ने का भी प्रस्ताव है, जो स्पष्ट करता है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने स्वयं के उद्देश्यों के लिए SEBC की पहचान करने और निर्दिष्ट करने की शक्ति होगी और ऐसी सूची केंद्रीय सूची से भिन्न हो सकती है
प्रस्तावित खंड इस प्रकार है: “खंड (1) और (2) में निहित किसी भी बात के बावजूद, प्रत्येक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कानून द्वारा अपने उद्देश्यों के लिए सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की एक सूची तैयार और बनाए रख सकता है, जिसमें प्रविष्टियां केंद्रीय सूची से अलग हो सकती हैं।”Refrence(livelaw.hindi.in)

यह अनुच्छेद 342A के खंड 1 और 2 में संशोधन करेगा और एक नया खंड 3 भी प्रस्तुत करेगा।

विधेयक अनुच्छेद 366 (26c) और 338B (9) में भी संशोधन करेगा।इसकी परिकल्पना यह स्पष्ट करने के लिये की गई है कि राज्य OBC श्रेणी की “राज्य सूची” को उसी रूप में बनाए रख सकते हैं जैसा कि यह सुप्रीकोर्ट के फैसले से पहले थी।

अनुच्छेद 366 (26c) सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को परिभाषित करता है।”राज्य सूची” को पूरी तरह से राष्ट्रपति के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा और राज्य विधानसभा को शक्तियां दी जाएगी(Ref.dirshti ias)

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